लेह-लद्दाख में 24-25 सितंबर 2025 को Gen-Z द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग की गई। यह आंदोलन हिंसक हो गया, जिसमें अब तक 4 लोगों की मौत और 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
क्या है लद्दाख का Gen-Z प्रोटेस्ट?
- लद्दाख के युवाओं (Gen-Z) ने पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन की शुरुआत की।
- सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में कई छात्र भूख हड़ताल पर चले गए और सड़कों पर उतरे।
- युवाओं ने बेरोजगारी, स्थानीय नौकरियों और क्षेत्रीय पहचान को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई।
हिंसा कैसे और क्यों फैली?
- शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन 24 सितंबर को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद माहौल हिंसक हो गया।
- प्रदर्शनकारियों ने लेह स्थित बीजेपी दफ्तर और सीआरपीएफ की गाड़ियों में आग लगा दी तथा पुलिस पर पथराव किया।
- पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया।
- इस हिंसा में 4 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
आंदोलन की मांगें क्या हैं?
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
- छठी अनुसूची के तहत क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा मिले ताकि स्थानीय भूमि, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा हो सके।
- स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाए और क्षेत्र के लिए अलग लोकसभा सीट बनाई जाए।
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया
- केंद्र सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए तैयार थी और 6 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित की गई है।
- हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने शांति की अपील करते हुए अपना अनशन समाप्त किया।
- बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने सरकार की नीतियों के खिलाफ युवाओं के असंतोष को जिम्मेदार बताया।
निष्कर्ष
लद्दाख में Gen-Z का यह आंदोलन क्षेत्रीय पहचान, संवैधानिक अधिकार, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक मंच की कमी जैसे मसलों पर केंद्रित है और इसका असर पूरे क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा पर पड़ता है।


